आखिर कैसे सफलता मिलेगी हिन्दी पट्टी को - भाग 2 मुखर्जी नगर में आजकल एक धरना चल रहा है , csat से दुष्प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने हेतु अतिरिक्त अटेम्प्ट की माँग हेतु !... पर एक दिन उधर से गुजरते हुये कुछ अन्य मुद्दों पर ऐसी बातें कान में पड़ीं , जो अच्छी नहीं लगीं मुझे .... कोचिंग , शिक्षक गणों और आयोग को दोष देकर आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते !... मैं नहीं कहता कि इनमें कोई कमी नहीं है , ये त्रुटि विहीन हैं पर इनमें परिवर्तन लाने मात्र से ही आपका चयन हो जायेगा ?....नहीं !.... आपका चयन होगा खुद में समयानुकूल बदलाव करने से , जिसकी कोई बात नहीं करना चाह रहा ...सब पुराने फंडों से अपना -2 समय काट रहे हैं ... कुछ लोग अपने फर्जी आँकड़ों का कटिया लेकर बैठे हैं मछली फाँसने को तो कुछ लोग बहानों की भारी गठरी लेकर चले जा रहें ताकि मीलों चलने पर भी बहाने खत्म न हों .....पर हमें तो वह रास्ता चाहिये जो हमें लक्ष्य तक पहुँचाये ... इस के लिये हमें सुधारों के पीछे की वास्तविक मंशा को समझना होगा , षडयंत्र सिद्धांत को भूलकर !.... आज हर स्तर पर नवोन्मेष की बात की जा रही है , इसी शब्द पर विचार करके आगे बढ़ना होगा ... नये सुधारों का उद्दयेश्य भी नवोन्मेष को बढ़ावा देना है .. हमें भाषा , विचारों के स्तर पर वह स्तर प्राप्त करना होगा ... ( पर क्या यह हमें वे कोचिंग्स दे सकते हैं जो अपने विग्यापनों में भी सही वर्तनी लिख पाने में अक्षम हैं ? )... यह लम्बा रास्ता है जो हमें खुद ही तय करना होगा , शेष लोग तो बस आपको दिशा बता सकते हैं ... इसके लिये आपको अपनी तैयारी 3 चक्रों में करनी होगी ... पहला चक्र बेसिक्स क्लियर करने का है ... दूसरा चक्र विशेषग्यता हासिल करने का है ..उत्तर लेखन की, तथ्यों के विश्लेषण की विशेषग्यता सबसे अहम है ... इसी चक्र में आपकी मदद कोचिंग कर सकती हैं ... लेकिन तीसरा चक्र भाषायी और वैचारिक मौलिकता प्राप्त करने का है , जो वास्तव में आजीवन चलता रह सकता है पर upsc में सफल होने भर की मौलिकता पाना अगर लक्ष्य है तो प्रतिदिन 100 पेज स्वतन्त्र अध्ययन करने , 500 शब्द अपने मन से लिखने और 2 प्रश्न प्रतिदिन मुख्य परीक्षा के लिये लिखने का अभ्यास करना होगा ! ..इनसे सम्बन्धित विषय सामाग्री मैं कमेंट बॉक्स में देना चाहूँगा ... क्योंकि उससे ज़रूरी कुछ रणनीतियों पर पहले चर्चा करना चाहूँगा ... पहला प्रश्न तो यही उठता है कि हमें इस तैयारी में कितना वक्त चाहिये ...साल भर , दो साल ...अथवा 5 साल ?...... मेरा उत्तर यही होता है कि यदि आप स्नातक स्तर पर अच्छा कमांड रखते हैं तो आपको सिर्फ एक साल चाहिये ...पर दुर्भाग्य से हिन्दी माध्यम की शिक्षा प्रणाली में आप पोस्ट ग्रेजुएट होकर सिर्फ कक्षा 8 तक की जानकारी और बौद्धिकता रख रहे होते हैं ... यहीं कोचिंग , मार्ग दर्शकों का काम शुरू होता है ..उन्हें आप को सबसे पहले स्नातक स्तर पर लाना होता है , पर इससे आगे का काम हमेशा आपको खुद करना होता है , वह है अभ्यास का !.... फिलहाल आपको पता है कि प्री में मुझे 105+ और मेंस में 750+ लाने की तैयारी करनी है ... उस स्तर पर आप पहुँच गये हैं इसे टेस्ट सीरीज , आपके मार्ग दर्शक, ग्रुप आदि निर्धारित कर सकते हैं .... मेरा मानना है कि साल भर आपको GS के 200*4 यानी 800 प्रश्नों का पूल बनाकर हल करना चाहिये , ये सभी संभावित प्रश्नों का पूल हो ... ऐसे ही वैकल्पिक विषय के 200 प्रश्नों के पूल को हल करें ... परीक्षा हाल में जानें से पहाले कम से कम 40 निबंध तो आप लिखकर अभ्यास कर ही लें ... एक बात ध्यान रखें इनका स्रोत मौलिक हो घिसा पिटा नहीं ... वह उस स्तर के विचारों से युक्त हो जिस स्तर पर upsc के परीक्षक सोचते , पढ़ते एवं विचार करते हैं ... प्री के पाठ्य क्रम में अभ्यास का बहुत महत्व है ..ज़ितनी अधिक बार आप माडल पेपर हल करेंगे उतना ही आत्म विश्वास और अनुभव अर्जित कर सकेंगे .... ध्यान रखें आपका मुकाबला सिर्फ आपसे है .... अन्य किसी से नहीं , आप उस स्तर के हैं जिसकी अपेक्षा upsc को है तो आपको कोई रोंक नहीं सकता यदि आपने अपने को परिश्रम और अभ्यास से लैस कर रखा है ... शेष जो भी छूटता लगेगा कमेंट बॉक्स में डालता जाऊँगा ... शुभकामनायें !
प्रिय दोस्तों,
ReplyDeleteउम्मीद है आप हमेशा की तरह व्यस्त और मस्त होंगे। मुख्य परीक्षा सिर पर है, मुझे मालूम है कि खूब पढ़कर भी एक अजीब सा तनाव महसूस कर रहे होंगे। यह बेहद स्वाभाविक है। मैं भी परीक्षा से पहले तनाव का सामना करता था। पर इसका यह मतलब नहीं, कि तनाव में बिखर जाएँ।
"मुश्किलें सब पर आती हैं,
कोई बिखर जाता है, और कोई संवर जाता है। "
मुख्य परीक्षा के ठीक पहले चलिए करते हैं कुछ काम की बातें :
1. यह आप बखूबी समझते हैं कि व्यर्थ के तनाव से कोई फायदा तो होने से रहा, बल्कि नुकसान ज़रूर हो सकता है। लिहाज़ा किसी की बातों में ज्यादा न आएं और खासकर शेखी बघारने वालों से बचें।
2. जो आपने नहीं पढ़ा है, जरुरी नहीं कि परीक्षा में वही आएगा। अतः जितना पढ़ा है, उतना काफी है। बस उसे दोहराते रहें और कूल रहें।
3. किसी एक सवाल या समस्या पर ज्यादा केंद्रित न हों, उससे ध्यान हटाकर आगे बढ़ें।
4. मित्रों, साल भर की तैयारी एक तरफ है और परीक्षा के दिन आपका प्रदर्शन एक तरफ है। अतः सिर पर ज़्यादा बोझ न रखते हुए मुस्कुराते हुए परीक्षा देने जाएं।
5. आपके ही कुछ ज्ञानी मित्र परीक्षा केंद्र के बाहर परीक्षा से कुछ मिनट पहले, लंच ब्रेक में और फिर परीक्षा के बाद प्रश्नों का विश्लेषण और उत्तरों की तुलना करते दिखेंगे। उनसे ठीक-ठाक दूरी बनाये रखें।
6 . सामान्य अध्ययन का या अन्य किसी विषय का कोई एक प्रश्नपत्र यदि कुछ खराब हो भी जाए, तो उसका तनाव कतई न लें, क्योंकि इसका ज़्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
7. चूँकि अब परीक्षा में अलग से उत्तर पुस्तिका नहीं मिलती, बल्कि प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका होती है, अतः समय बचाने का एक बेहतर तरीका यह हो सकता है कि पहले प्रश्न से शुरू करके अंत तक लिखते जाएँ।
8. महत्वपूर्ण बातों को अंडरलाइन करने से अच्छा प्रभाव पड़ता है।
9. कोशिश करें कि आपके पैराग्राफ बहुत लम्बे न हों।
10. कोशिश करें कि पूरा प्रश्नपत्र अटेम्प्ट कर सकें, खासकर एथिक्स और ऑप्शनल सब्जेक्ट में।
11. यदि कहीं पर 200 शब्दों में उत्तर लिखने की अपेक्षा की गयी है, तो बेफिक्र होकर 150 से 175 शब्दों में लिख दें। महत्वपूर्ण बातों और तर्कों को कम शब्दों में समेटने की कोशिश करें।
12. यदि कोई उत्तर लिखते समय कोई हाल-फिलहाल का घटनाक्रम ध्यान आये, तो उसका भी प्रासंगिक उल्लेख कर सकते हैं।
13. चीज़ों को जोड़ना और उन्हें समग्र रूप में देखना सीखें और समस्या को सभी पहलुओं के साथ समझने की कोशिश करें।
14 . अच्छा प्रस्तुतीकरण और स्पष्ट लेखन अंक बढ़ाते हैं, अतः इनकी अनदेखी न करें।
15. अपनी ज़िन्दगी दाव पर लगाकर परीक्षा देने की प्रवृत्ति से बचें और निश्चिन्त होकर उत्तर लिखें।
16. अब समय बहुत काम बचा है, अतः रिवीजन, केस स्टडी का अभ्यास और कुछेक निबंध लिखने को प्राथमिकता हैं।
अंत में यही कहना है, कि 'अंत भला सो सब भला।' मतलब अगर अभी भी आप अच्छे से लिखकर आ जाते हैं तो पहले की सब लापरवाहियां बेअसर हो जाएँगी। इसलिए व्यस्त और मस्त रहते हुए जुट जाइये।
मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
---आपका निशान्त
उपरोक्त कमेंट्स २०१५ के हिंदी माध्यम के टॉपर निशांत जैन के ब्लॉग से उद्धृत है
ReplyDeleteहिन्दी साहित्य मेरा पसंदीदा विषय है। इसे पढ़कर मुझे अजीब सा सुकून मिलता है। सिविल सेवा परीक्षा के वैकल्पिक विषयों की सूची में भी हिन्दी साहित्य अभ्यर्थियों का एक पसंदीदा विषय है। हिंदी माध्यम के छात्रों का इस विषय की ओर सहज रुझान रहा है। इस विषय की लोकप्रियता का कारण इसका रुचिकर होने के साथ-साथ अंकदायी होना भी है। इस विषय में मुझे सौभाग्य से इस साल 313 अंक मिले हैं, जो संभवतः सर्वाधिक हैं। बहरहाल, आइये, बात करते हैं हिन्दी साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में लेने वालों के लिए, बेहतर प्रदर्शन के कुछ जरुरी बिन्दुओं की :
ReplyDelete1. सबसे पहली बात यह है कि व्याकरणिक अशुद्धियों से बचें और सहज व सरल भाषा का प्रयोग करें।
2. पाठ्यक्रम में निर्धारित सभी पुस्तकों को पढ़ जरूर लें, ताकि व्याख्या करते समय सही सन्दर्भ लिख सकें।
3. अच्छे अंक पाने के लिए व्याख्या खंड में सही सन्दर्भ पहचानना बेहद ज़रूरी है। पद्य खंड में सन्दर्भ पहचानना आसान होता है और व्याख्या करना कठिन। जबकि गद्य खंड में सन्दर्भ पहचानना कठिन होता है और व्याख्या करना आसान।
4. कोशिश करें कि प्रथम प्रश्नपत्र को ठीक से पढ़ और समझ लें। यदि आपको साहित्य का इतिहास ठीक से पता होगा तो द्वितीय प्रश्नपत्र में काफी मदद मिलेगी।
5. पूरे पाठ्यक्रम को एक बार पढ़ जरूर लें ताकि सब लेखकों और उनकी निर्धारित रचनाओं के बारे में आपको बेसिक जानकारी जरूर हो, ताकि मुश्किल वक़्त में उसका प्रयोग कर पाएं।
6. कोशिश करें कि प्रश्नपत्र को क्रमवार हल करते चलें। क्योंकि परीक्षक भी उसी क्रम में कॉपी जांचेंगे।
7. हिन्दी के पेपर में जीएस की तरह वक़्त की उतनी कमी नहीं होती, अतः पूरा प्रश्नपत्र हल करने का प्रयास करें।
8. चूँकि अब प्रश्नों की संख्या ज़्यादा होती है और शब्दसीमा कम, इसलिए पूरे पाठ्यक्रम की थोड़ी-थोड़ी जानकारी और समझ अवश्य रखें। हर टॉपिक को संक्षेप में तैयार कर लें।
9. अब सिर्फ एक महीना बचा है, इसलिए अनावश्यक विस्तार से बचते हुए पूरे पाठ्यक्रम को संक्षेप में दोहरा लें।
10. विभिन्न लेखकों और कवियों के कथन और काव्य पंक्तियाँ विशेषकर द्वितीय प्रश्नपत्र में विशेष महत्त्व रखती हैं। उदाहरण देने से आपके कथन और तर्कों की पुष्टि हो जाती है। इसलिए प्रसंग के अनुरूप उदाहरण लिखने में हिचकिचाएं नहीं। पर ध्यान दें, उदाहरण प्रासंगिक और संगत लगने चाहिएं, ऊपर से थोपे हुए नहीं।
11. आपने इन कोटेशन्स को जहां भी नोट किया है, वहां से इन्हें निरंतर दोहराते रहें। पर साथ ही हर पंक्ति के साथ उसका प्रसंग या प्रतिपाद्य जरूर लिख लें। मसलन, कबीर की भाषा के बारे में लिखते हुए 'संस्किरत है कूप जल, भाखा बहता नीर' लिख सकते हैं। 'काहे री नलनी, तू कुम्हिलानी' से कबीर के दर्शन और रहस्यवाद को जोड़ लें। 'किलकत कान्ह घुटरुवनि आवत' सूर के वात्सल्य का अच्छा उदाहरण है। 'समन्वय उनका करे समस्त, विजयिनी मानवता हो जाय', कामायनी के समरसता के दर्शन को प्रतिपादित करती हैं।
12. भाषा खंड को लेकर अभ्यर्थियों में एक अजीब सा भय रहता है। दरअसल यह खंड कम मेहनत में अधिक अंक देता है। इसकी सभी यूनिट्स को संक्षेप में तैयार कर लें। मसलन पाली, प्राकृत और अपभ्रंश में से प्रत्येक की अगर आपको 6-7 विशेषतायें पता हैं तो इतना काफी है। राजभाषा, राष्ट्रभाषा, संपर्क भाषा को ठीक से तैयार करना बेहतर विकल्प है।
13. यदि मैं अपनी बात करूँ, तो मुझे प्रथम प्रश्नपत्र में भाषा खंड और द्वितीय प्रश्नपत्र में काव्य खंड अधिक प्रिय हैं। और मैंने इन्हीं से अधिक प्रश्न हल किये थे।
14. हिंदी साहित्य के उत्तर पैराग्राफ में ही लिखें, बिन्दुवार नहीं।
15. सहज और सरल भाषा का प्रयोग बेहतर है, पर ज़रूरत पड़ने पर साहित्यिक शब्दावली का प्रयोग करते रहें।
( निशांत जैन )
सिविल सेवा परीक्षा में कैसे लिखें निबंध ....
ReplyDeleteप्रिय दोस्तों,
मुख्य परीक्षा के वर्तमान पैटर्न में निबंध के प्रश्नपत्र का महत्त्व बेहद बढ़ गया है। ऐसे में इस पेपर को नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है।
पर आश्चर्यजनक बात यह है कि हम में से अधिकतर लोग निबंध के पेपर के महत्त्व को जानते हुए भी अक्सर इसकी अनदेखी करते हैं।
दरअसल यह एक ऐसा पेपर है, जिसमें प्राप्तांकों की रेंज बहुत ज़्यादा है। किसी को 250 अंकों में से महज 50 अंक मिल पाते हैं तो कोई 150 अंक लाकर अपनी सफलता की राह को आसान बना लेता है। सौभाग्य से, मुझे 2014 की मुख्य परीक्षा में 160 अंक मिले, जिसके बूते मैं 13 वीं रैंक और मुख्य परीक्षा में तीसरी रैंक प्राप्त कर सका। अगर हिन्दी माध्यम के परीक्षार्थियों की बात करें, तो इस पेपर का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस साल से हिन्दी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी परीक्षार्थियों की सफलता में निबंध के पेपर का अच्छा-खास योगदान है।
लिहाज़ा निबंध के प्रश्नपत्र में अच्छे अंक पाने के लिए इस पर थोड़ा ध्यान दें:
1. अभ्यास का कोई विकल्प नहीं है। हर हफ्ते तीन घंटे के लिए बैठें और डेढ़-डेढ़ घंटे में कुल 2 निबंध लिखने का अभ्यास ज़रूर करें। इसका आपको बेहद फायदा होगा।
2. पहले कुछ मिनटों में निबंध की एक लिखित रूपरेखा ज़रूर बना लें, इसमें निबंध के विषय के विस्तार के पक्ष, तथ्य, उदाहरण और उक्तियाँ शामिल कर सकते हैं।
3. विषय तसल्ली से चुनें। उसी क्षेत्र के विषय चुनें, जिन पर आपकी पकड़ और समझ अच्छी हो। उदाहरण के लिए, विज्ञान पृष्ठभूमि के लोग तकनीकी विषयों पर कुछ बेहतर लिख सकते हैं। मुझे साहित्य-संस्कृति-मीडिया और अध्यात्म से जुड़े विषय ज़्यादा आकर्षित करते हैं। अमूर्त विषयों पर मैं ज़्यादा बेहतर लिख पाता हूँ। मेरी सलाह है कि अपनी रूचि और सम्बंधित विषय क्षेत्र की समझ के आधार पर निर्णय लें।
4. शुरुआत प्रस्तावना से करें, जो कई तरह की सकती है, जैसे कोई प्रसिद्ध कथन या उक्ति, कोई उदाहरण या विषय की पृष्ठभूमि। पर प्रस्तावना में एक विजन होना चाहिए और विषय के विस्तार का संकेत भी होना चाहिए।
5 . निबंध को पैराग्राफ में ही लिखें। एक पृष्ठ पर दो से तीन पैराग्राफ अच्छे लगते हैं।
6. जिस तरह खाना न केवल अच्छा बना हो, बल्कि उसका ढंग से परोसा जाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ठीक इसी तरह निबंध में भी प्रस्तुतीकरण का अच्छा-खासा महत्त्व है।
7. विषय का विस्तार करते वक़्त कोशिश करें कि उसके ज़्यादातर पहलुओं को छू सकें। हर विषय के बहुत से पक्ष हैं, जैसे- आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक। जितने ज़्यादा पहलुओं को छुएंगे, उतना अच्छा प्रभाव पड़ेगा। पर व्यर्थ के विस्तार से बचें।
8. क्रमबद्ध और व्यवस्थित ढंग से लिखें। बेतरतीब और मनमाने ढंग से लिखना खराब प्रभाव छोड़ता है।
9. शब्द सीमा का अतिक्रमण करके समय और श्रम व्यर्थ न करें।
10. निबंध पूरे जीवन के अध्ययन और अनुभव का एक निचोड़ है। लिहाज़ा पढ़ते रहें, लिखते रहें और सीखते रहें।
'' ''कुछ लिखकर सो, कुछ पढ़कर सो,
तू जिस जगह जगा सवेरे, उस जगह से बढ़कर सो।''
-- ( भवानी प्रसाद मिश्र)
-- शुभकामनाओं के साथ …
निशान्त जैन
इस साल यूपीएससी टॉपर रहे राजस्थान के गौरव अग्रवाल का कहना है कि सफलता के लिए ज़रूरी है कि इंसान अपनी कमी को छिपाने के बजाए उसे स्वीकार करे और उसमें सुधार लाने की कोशिश करे.
ReplyDeleteआइए जानते हैं और क्या कुछ कहा गौरव ने बीबीसी से बातचीत के दौरान.
अपने बारे में कुछ बताइए कि आपने कहां से पढ़ाई की, क्या पारिवारिक पृष्ठभूमि थी और किस तरह आप इस मुक़ाम तक पहुंचे?
गौरव अग्रवाल: मैं जयपुर का रहने वाला हूं. मेरे पिता श्री एसपी गुप्ता जयपुर डेयरी केंद्र में मैनेजर हैं और मेरी मां गृहिणी हैं. मेरी एक बड़ी बहन हैं, जिनकी शादी हो चुकी है और वो इस समय अमरीका में हैं. मेरे जीजाजी माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हैं.
मैंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर के एडमंड्स स्कूल से की. उसके बाद मैंने आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया. आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में पूरे भारत में मेरी 45वीं रैंक आई थी. आईआईटी के बाद मैंने आईआईएम लखनऊ से एमबीए किया. आईआईएम में मुझे गोल्ड मेडल मिला.
इसके बाद मैंने क़रीब चार साल तक हाँग-काँग में सिटी ग्रुप में काम किया. मैं इनवेस्टमेंट बैंकिंग में काम करता था. मैंने वहां 2011 के अंत तक काम किया. उसके बाद वो जॉब छोड़कर आईएएस की तैयारी करने लगा.
पिछले साल पहले प्रयास में मेरी 244 रैंक आई. इसके बाद मुझे राजस्थान कॉडर में आईपीएस मिला और फिर इस साल पहली रैंक आ गई.
परीक्षा में कामयाबी
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गौरव का मानना है कि अपनी कमजोरियों का सामना करके बड़ी से बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.
आप इतने प्रतिभावान छात्र रहे हैं. आपने किस तरह से पढ़ाई की और कितनी मेहनत की?
गौरव अग्रवाल: देखिए, मेहनत तो सभी करते हैं. मेरा हमेशा से मानना रहा है कि आम तौर पर इस तरह की परीक्षाओं में हमें कभी भी दूसरों से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए. हमें बस अपने आप को और बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए. तो हर रोज़ अपने आप से प्रतिस्पर्धा कीजिए.
दूसरी बात ये कि अगर आपको कभी भी अपनी किसी कमी के बारे में पता चलता है तो उसे छिपाने या उससे डरने के बजाए उनको स्वीकार कीजिए और उनमें सुधार लाने की कोशिश कीजिए. अपनी पूरी मेहनत कीजिए और फिर जो होना होगा, देखा जाएगा.
आप इस सफलता के पीछे क्या वजह मानते हैं?
गौरव अग्रवाल: सफलता के पीछे मेहनत तो एक वजह होती ही है. इसके अलावा अपने घरवालों और दोस्तों का पूरा सहयोग था और फिर क़िस्मत होती है.
भारतीय पुलिस
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भारतीय प्रशासनिक सेवा को काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है.
माता-पिता से कितना बड़ा सहयोग मिला?
गौरव अग्रवाल: बचपन से लेकर आज तक उन्होंने ही प्रोत्साहित किया. पापा मेरी और मेरी बहन की पढ़ाई में काफ़ी रुचि लेते थे. आईएएस की पढ़ाई में भी पापा ने काफ़ी साथ दिया. मेरे मौसा जी और मेरे फूफा जी ने भी मेरा मार्गदर्शन किया. सबके साथ और सबके आशीर्वाद से ही इस तरह की सफलता मिल पाती है.
इतने साल तक आपने निवेश बैंकर तक काम किया. मेरा आकलन है कि आपको विदेश में अच्छा-ख़ासा वेतन मिल रहा होगा. तो आपने प्रशासनिक सेवा में जाने का फ़ैसला क्यों किया?
गौरव अग्रवाल: प्रशासनिक सेवा जैसे जॉब काफ़ी अलग होते हैं. इस तरह के जॉब आपको निजी क्षेत्र में नहीं मिल सकते हैं. इनमें आप सीधे जनता से रूबरू होते हैं. आपको लोगों के बीच में जाना होता है. लोगों की समस्याओं को हल करना होता है. इसलिए ये जॉब मुझे काफ़ी अपील करती है.
आप क्या प्रशासनिक बदलाव लाना चाहते हैं?
गौरव अग्रवाल: जी हां, ये तो समय ही बदलाव का है. तो बदलाव तो आएंगे ही. हम भी एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं. हमारे यहां प्रशासन से जुड़े कुछ मसले हैं. जैसे फ़ाइलें लटकी रहती हैं. कुछ काम नहीं होता. आमतौर पर प्रशासन की नागरिकों के प्रति सहानुभूति नहीं रहती. हमें इस माहौल को बदलना होगा.
( गौरव अग्रवाल बीबीसी पर )
सफलता का श्रेय किसे देती हैं :
ReplyDeleteअपनी माँ को। माँ ने ही शुरू से उन्हें IAS के लिए inspire किया और preparation में पूरी तरह उनके साथ लगी रहीं। इसलिए Tina कहती हैं, “इस success पे जितना हक़ मेरा है उतना ही मेरी माँ का भी है ”
माँ से पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, “ Tina ने बहुत -बहुत मेहनत की है …10-10 घंटे पढ़ती रहती थी।।कहना पड़ता था कि बस अब सो जाओ …”
उनकी माँ को उनपर बहुत गर्व है, उनका कहना है –
My daughter- My Hero
Civil Services Exam में सफलता के लिए क्या करना चाहिए:
इस प्रश्न के उत्तर में Tina कहती हैं :
Hard work करते रहिये …there is no substitute to hard work।
हार मत मानिए
Focused approach रखिये
Disciplined रहिये …।सब कुछ छोड़ कर पढाई करिये।
Patience रखिये
Determined रहिये …कोई भी दिन बेकार न जाये।
Tina ने state cadre preference में Haryana का नाम दिया है। जिसके कई कारण हैं, हरयाणा उनके घर यानि दिल्ली से सबसे करीब है, हरयाणा में gender inequality की बड़ी समस्या है जिसे वो address करना चाहती हैं, etc
तो ये तो हो गयी media से की गयी बातें। अब आते हैं main बात पर …
Tina की सफलता का सबसे बड़ा कारण क्या है ?
दोस्तों मैंने AKC पर बहुत पहले एक post share की थी : “10000 Hour Rule : बने अपने Field के Expert”, आपने नहीं पढ़ी हो तो please एक बार पढ़ लें वैसे in short…
10k hour rule is an idea that it takes approximately 10000 hours of deliberate practice to master a skill।
यानि किसी भी skill को master करने के लिए 10,000 घंटे की deliberate practice की ज़रुरत होती है।दूसरे शब्दों में कहें तो यदि कोई व्यक्ति किसी भी चीज में महारथ हांसिल करना चाहता है तो उसे कम से कम वो काम 10,000 घंटे करना होगा।
अब Tina का case लेते हैं।
Tina जब 11th class में थीं तब उन्होंने peer pressure की वजह से Science subjects chose किये थे …पर अपनी माँ के समझाने पर कि तुम्हारा interest humanities subjects में अधिक है और तुम्हे वही पढ़ना चाहिए …टीना ने अपने subject change करा दिए और Arts subjects पढ़ने लगीं।
चूँकि उनके मात -पिता भी civil servants हैं इसलिए घर का माहौल ही कुछ ऐसा रहा होगा कि Tina को ये बात clear थी कि आगे चल कर उन्हें भी UPSC के exam में बैठना है। लिहाजा, वो 11th से ही अपने favourite subject Political Science को पढ़ने लगीं और आगे चल कर civil services exam में भी इसी subject को opt किया।
अपने interview में उन्होंने बताया कि वो कभी भी 8 घंटे से कम नहीं पढ़ीं और बहुत बार 14 -14 घंटे भी पढ़ाई की।
अगर हम उनका average study hours 10 भी मान लें तो ग्यारहवीं से लेकर ग्रेजुएशन तक में ही उन्होंने 5 साल खूब जम कर पढ़ाई की। अगर इसे घंटो में calculate करें तो ये होता है :
5x365x10= 18250 घंटे।
जिसमे से I am quite sure की इन अठारह हज़ार + घंटो में से directly-indirectly कम से कम दस हज़ार घंटे IAS एग्जाम से रिलेटेड चीजें पढने में लगायी होंगी, खासतौर से IAS के अपने optional subject Political Science को उन्होंने ख़ासा time दिया होगा, यही वजह है कि Political science में वो University Gold medalist भी रही हैं।
यानि, उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण है काफी पहले से अपने लक्ष्य का पता होना और उसे पाने के लिए 10000 घंटे से अधिक की कड़ी मेहनत करना।
लेकिन शायद आप सोच रहे हों की बहुत से लोग 10000 या उससे अधिक घंटे पढ़ाई करते हैं पर हर कोई आईएएसअफसर नहीं बन पता?
इसका राज छिप है “10000 hour rule” के दो शब्दों में…”deliberate practice” यानि जानबूझ कर अपने काम में महारथ हासिल करने के लिए एफ्फोर्ट्स डालना।
तैयारी बहुत लोग करते हैं पर मुझे लगता है कि जो लोग क्वालीफाई करते हैं वे इस एग्जाम से जुड़े हर एक aspect में खुद को improve करते रहते हैं। फिर चाहे वो लिखने का तरीका हो, subject knowledge हो, interview की तैयारी हो, हर एक चीज में खुद को पहले से बेहतर बनाते चलते हैं। बहुत से लोग जिस चीज में अच्छे हैं बस उसी को और अच्छा करने में लगे रहते हैं लेकिन qualifiers अपनी weaknesses पर कड़ी मेहनत करते हैं और अपनी strengths को और बेहतर बनाते हैं।
और घंटों पढाई करने पर भी चयनित न होने का एक रीज़न मुझे आईएएसश्रेयांश मोहन (रैंक 447) के इन शब्दों में नज़र आता है-
ज्यादा घंटे पढने की बजाए ज्यादा ईमानदारी से पढने की आदत डालें।
सची ही तो है, लोग किताबें तो घंटों लेकर बैठे रहते हैं पर पढ़ते कितना है ये मायने रखता है!
और लक फैक्टर भी कहीं न कहीं अपना role play करता है इसलिए कुछ लोग सब कुछ करने के बावजूद चूक जाते हैं…खैर ऐसे लोगों के लिए ही तो UPSC ने multiple attempts allow कर रखे हैं… so never give up…मंजिल ज़रूर मिलेगी।